Man Mast Hua Poem Lyrics Hindi | English - Kabir Das - All Movie Song Lyrics

Man Mast Hua Poem Lyrics Hindi | English - Kabir Das

Man Mast Hua Peom Lyrics - Kabir Das

Man Mast Hua Peom by Sant Kabir Das Ji


Man Mast Hua Poem Lyrics:

Man Mast Hua Poem Lyrics in Hindi and Meaning:

मन, मस्त हुआ. फिर क्या बोले
क्या बोले फिर क्योँ बोले….

जब मन भगवान के प्रेम में मस्त हो गया है तो फिर अब कुछ और करने को बोलने नहीं रहा। 

हलकी थी. जब चढ़ी तराजू….
पूरी भई तब क्या तोलै

जब पैदा हुए तब एकदम खाली थे हलके थे कुछ नहीं था मन में जैसे की ईर्ष्या घृणा किसी भी प्रकार का कोई भेद भाव नहीं था। और अब मैं प्रभु प्रेम से पूरा भर गया तो फिर तोलने की क्या जरुरत है 

हीरा पाया बांध गठरिया….
बार बार वाको क्यों खोले 

मुझे एक हीरा (रत्न) मिला और मैंने उसे एक गठरिया में बंद करके रख दिया। अब उस गठरिया को बार बार खोल कर देखने की क्या जरुरत है। 

गठरिया = Beg (सामान रखने की पोटली)
हीरा = धन ( जो मैंने मेरी जीवन में कमाई की है ) 
(Kabir Das Poem in Hindi with Meaning)


हंसा नहाये मानसरोवर….
ताल तलैया में क्यों डोले 

तेरा साहब है घर माँहीं….
बाहर नैना क्यों खोलै

तेरा साहब यानी तेरा भगवान तेरे मन के भीतरी घर में तू उसे तेरे अंदर खोज 
आँखे खोल कर बाहर की दुनिया में क्या खोजता है बाहर कुछ भी नहीं है। 
साहब =भगवान 
नैना आँखे 

कहै कबी.र सुनो भाई साधो….
साहिब मिल गया तिल ओले 

कबीर कहते हैं, सुनो प्रिय साधकों, मैंने एक तिल के दाने में भी परमात्मा को पाया है। 
साधो = साधक 
साहिब =भगवान, परमात्मा 
तिल ओले = तिल का दाना 

Kabir Das Poem in Hindi

Man Mast Hua Poem Lyrics in English and Meaning:

Aaj badra utha prem ka
Hum par barsa hoi
Clouds of love have risen today...
They have showered down on me

Harshili ho gayi aatma
Hari bhari ban rayi
The life within me is now full of joy…
And the world around me serene

Mann mast hua, Phir kya bole
My heart is now drunk on love, I find no need to speak…

Kya bole phir kya bole 
Oh how can i describe this!

Halki thi jab chadi taraaju, Puri bhari ab kyon tole
i climbed the weighing scale, when i felt small
what is the need to measure, now that i feel full!

Heera paaya, baandh gathariya, Baar-baar vaa ko kyon khole
I have found an invaluable gem and tied it safely within...
Why open the knot again and again?

Hansa nahaaya Mann sarovar, taal taleiya mein kyon dole
This swan has bathed in the lake Manasarovar...
Now why would it dwell in ponds and puddles?

Kehat kabir suno bhayi saadho, Sahib mil gayaa til ole
Kabir says, listen dear fellow seekers, I have found the divine even in a grain!

(Kabir Das Poem in English)

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